ये चंद पल भी रास आयेंगे
हम निकले हैं एक अंत से
हम समाप्त हो जायेंगे दूसरे अंत से
जो करना है कर लो इसी बीच
बस सद्भावना रखो, न मानो किसी को नीच
कुछ लोगों के लिए जिंदगी आसान है
कुछ लोगों के लिए यह बहुत कठिन काम है
मानो या ना मानो यह सब नसीब का खेल है
सबके लिए अलग मापदंड हैं फिर कोई पास और कोई फेल है
इस असमता को कैसे हराओगे
मार्क्सवाद से तो स्थिति और मुश्किल बनाओगे
स्वीकार कर लो इस अस्थाई जटिलता को
और क्या चारा है हमारे पास सुलझाने काअस्तित्व की कुटिलता को
कोशिश करो खुश रहने की क्योंकि शायद खुशी ज्यादा मधुर है
क्योंकि उसमे उग्रता कम है जिससे स्थिति जाती सुधर है
हर व्यक्ति अपने हिसाब से ही चलेगा, अपेक्षा मत रखो
जबर्दस्ती चीजों को करवाने की चेष्टा मत करो
एक दिन आये हैं, एक दिन चले जाएंगे
अच्छा वातावरण रखेंगे तो ये चंद पल भी रास आयेंगे ।
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