शीर्षक- जब धरा बनेगी स्वर्ग
सारे जीवों का कल्याण
जब बन जायेगा सबका निर्वाण
जब समाज से सारा अभाव हट जायेगा
जब संसाधनों की कमी का मुद्दा मिट जाएगा
जब विग्यान और तकनीकी अपने चरम पर होंगी
जब जीवन अनंत और स्वयं मृत्यु अपने क्रिया करम पर होगी
जब नैतिकता में मनुष्य इतना ऊपर चढ़ जाएगा
जब ईसा, बुद्ध, कृष्ण, महावीर से हर मनुष्य आगे बढ़ जाएगा
जब पृथ्वी का राज संपूर्ण ब्रम्हांड पर होगा
जब हर मानव का जीवन पूर्णतः सुंदर कांड सा होगा
जब प्रेम की हिम गिरेगी दुनिया-भर में
जब हर सीता चुनेगी अपने राम स्वयंवर में
जब शीतल रहेगा हमेशा सभी का तन, मन, धन
जब चलेगी सदा ठंडी हवा, खुशियों महकेंगी हर आंगन
जब विग्यान और प्रग्यान का होगा अनोखा संगम
जब बड़ी चीजें लायेंगी छोटे परिवर्तन
जब छोटी बातों से मिलेगा बहुत बड़ा समर्थन
जब लोगों की व्यवस्था पूर्णतः बदल जाएगी
जब सारे शिकवे, शिकायतें सुलझ जायेंगी
एसा स्वर्णिम युग आना ही है, आ के रहेगा
हर मनुष्य इस स्थिति को चाहता है, और पा के रहेगा
बस चलते रहो सतत अच्छाई की ओर
भले मिले न कोई अंत, पर जल्दी ही मिलेगा एक छोर
एक दिन आयेगा ऐसा, जब न कोई धर्म होगा, न होगा कोई वर्ग
एक ऐसा सुनहरा समय, जब धरा बनेगी स्वर्ग।।
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