शीर्षक - हमे दुनिया से सेनाओं को भंग करना होगा


दुख बहुत हैं इस विशाल दुनिया में 

अंतरिक्ष विग्यान से लेकर मिर्चा-धनिया में 

हमे हालातों से लड़कर दुखों को अपदस्थ कर देना है 

हमे शांति और समृद्धि को विश्वभर में सर्वशक्त कर देना है 

इस जगत की सबसे बड़ी कमजोरी विभाजन है 

लाना हमे एक सुनहरा, सशक्त शासन है 

हमको एक ऐसा आंदोलन खड़ा करना है 

लोगों की सोच को वृहत, बहुत बड़ा करना है 

राष्ट्र जिसे माना गया आधुनिक दुनिया का आधार है 

वही वास्तव में बनाता विकास को निराधार है 

राष्ट्रों का जो सबसे विकृत सिरा है 

वह उनके बीच की सेना की प्रथा है 

अगर सारी सेनाओं को कर दिया जाए निष्क्रिय और सीमित 

तब उभरेगी मनुष्य की शक्ति होकर अपार और अपरिमित 

सेना-विहीन विश्व में पुनर्परिभाषित होगा राष्ट्र का अस्तित्व 

होंगी खुली सरहदें, बंद होगी सैन्य प्रतिस्पर्धा और उससे जुड़े कृतित्व

एक दिन तो आएगा ही जब सेनाएं उखड़ जाएंगी 

पर जल्दी लाना है वह समय वर्ना प्रगति बहुत पिछड़ जाएगी 

परिवर्तन अक्सर अपने-आप नही होता 

जब तक कुछ मेहनती लोग नही खोदते जमीन जिससे निकलता है सोता 

इस बदलाव के लिए हमे बहुत परिश्रम करना होगा 

हमे उठना होगा और फिर गिरकर उठना होगा 

एक विश्वव्यापी आंदोलन को चढ़ाना है 

अधिक से अधिक लोगों को उसके प्रभाव में  लाना है 

यह महाक्रांति है दुनिया की सर्वोच्च आवश्यकता 

अगर मिल गया यह मुकाम तो मिल जाएगा हमे सबसे सुंदर गुलदस्ता 

अगर छूट गयी यह गाड़ी तो फिर देर हो जाएगी

अमन और समृद्धि की चाहत कई और सदियों के लिए ढेर हो जाएगी 

हमे प्राप्त इस लक्ष्य को तुरंत करना होगा 

हमे दुनिया से सेनाओं को भंग करना होगा। 

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