शीर्षक- आइए एक ऐसा विश्व आंदोलन खड़ा करते हैं


मोक्ष का है लक्ष्य 


कोई न ले इसे भक्ष


पाना सभी को है यह मुकाम 


क्यों न संगठित होकर करें यह काम 


इस तथ्य को मानकर 


एक संगठन स्वीकार कर 


कि हम सब आत्माएं हैं 


हम सब परमानंद को चाहे हैं 


आत्मा स्व्यं ही परमात्मा है 


और नहीं कोई विश्वात्मा है 


अहिंसा को कुछ इस तरह बांधना है 


सभी को उस डोरी को फांदना है 


एक घेरे में लाकर 


एक बंधन बनाकर 


करना है विराट विकास 


जो उत्तेजित कर दे सारे श्वास 


समाज और अर्थव्यवस्था को सुधारकर 


एक सर्वसंपन्न जहां बनाकर 


विग्यान और तकनीकी को ऊपर चढाकर 


मनुष्य को शारीरिक अमरत्व दिलाकर 


जब सामाजिक-आर्थिक विषमताएं खत्म होंगी 


जब वैग्यानिक-तकनीकी क्षमताएं सर्वप्रथम होंगी 


तब बरसेगी अकूत नैतिकता 


जिसमे झिलमिलाएगी संपूर्ण मानवता 


तब ब्रम्हांड का एकाकार होगा 


उससे बढ़िया नही कोई आकार होगा 


तब सर्वस्व आतमापूर्ण हो जायेगा 


तब अस्तित्व संपूर्ण हो जायेगा 


हर व्यक्ति जो वास्तव में था, वही हो जाएगा 


इतने सारे भगवानों में भ्रम खो जाएगा 


यह है सर्व-मोक्ष प्राप्ति अभियान 


जिसको लाएगा गहन सामाजिक, वैज्ञानिक, नैतिक काम 


तो आइए एक ऐसा विश्व आंदोलन खड़ा करते हैं 


जिसमें मृत्यु को सजा-ए-मौत सुनाकर, आनंद को बाईज्जत रिहा करते हैं।


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