शीर्षक - स्वागतम, सुस्वागतम भावी, आगामी नागरी भविष्य
एक दिन दुनिया का हर देश खंडित हो जाएगा
जो घौंस जमाते हैं बड़े देश छोटे देशों पर, वह सब दंडित हो जाएगा
जब सारे गांव सिकुड़ और सिमट जाएंगे शहरों में
जब समा जाएंगे छोटे शहर बड़े नगरों में
जब राष्ट्रों का संपूर्ण औचित्य खत्म हो जाएगा
जब संसाधनों का निर्धारित आधिपत्य खत्म हो जाएगा
जब सबको मुहैय्या होगा सबकुछ और सबकुछ
जब नहीं रहेगी संपदा सीमित लोगों में केवल कुछ-कुछ
जब बड़े शहर उभरेंगे बनकर सामाजिक-आर्थिक इकाई
जब उनका काम होगा प्रबंधन, नही होगी कोई लड़ाई
जब इन नगर इकाईयों के बीच नही होगी कोई सेना या प्रतिस्पर्धा
जब पान खाएंगे सब मीठा, जिसमे नही होगा कोई जर्दा
राष्ट्र है आज की जरूरत, कल ऐसा नही होगा
बदलेगी मांग और आपूर्ति की परिभाषा, उस पल पैसा नही होगा
जीवन बन जायेगा सरल, संपन्न, समृद्ध
स्वास्थ्य होगा सबका हृष्ट-पुष्ट, युवा की तरह जियेंगे वृद्ध
गांव का चलता हुआ अस्तित्व कमजोरी है, लाचारी है
नगर ही वास्तव में सफल हैं, छुड़ाना पिछड़ेपन की बीमारी है
समय लायेगा परिवर्तन लेकिन हमे बहुत मेहनत करनी होगी
सुनहरी सभ्यता को स्थापित करने के लिए हमे बहुत जुर्रत करनी होगी
तब सबको मिलेगी संपूर्णता, चाहे बच्चा हो या वरिष्ठ
स्वागतम, सुस्वागतम भावी, आगामी नागरी भविष्य
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