शीर्षक - जब मिथ्याएं मिटायेंगी मिथक
मिथ्या को छोड़ो मत
संघर्ष को मरोड़ो मत
मिथ्यों की बड़ी जरूरत है
उनके बिना सबकुछ बदसूरत है
मिथ्या चाहिए हमें मिथकों को मिटाने के लिए
उनकी जरूरत है हमे दुनिया से बुराई हटाने के लिए
क्या नहीं लिया था भगवान कृष्ण ने अधर्म का सहारा
जब उन्हे जीतना था धर्म-युद्ध, बदलना था सारा नजारा
हमे अगर बनाना है एक शांतिपूर्ण संसार
जिसमे प्रबल और प्रशस्त हो अहिंसा का अभिसार
तो हमें मिथ्या को जुटाना होगा
एक और एक को ग्यारह बनाना होगा
मनुष्य के मन और जीवन में बहुत क्लिष्टता है
इस यथार्थ को बदलना है हमें, यह निश्चित सा है
जब तक नहीं उमड़ता एक व्यापक आंदोलन
जो निरस्त कर दे बुराई को और मिटा दे सारी अड़चन
आइये जुटायें एक प्रबल और प्रशस्त ऊर्जा
जिसका कोई सानी न हो, जिसके ऊपर न हो कोई दूजा
अगर दुनिया की कड़वाहट को झुटलाना है
अगर दुनिया को अच्छी तरह से बदल के जाना है
तब हमें अनेक मिथ्याओं को अपनाना होगा
उससे संसार की कड़वाहट को भगाना होगा
मिथ्या एक जहर है सारी बुराईयों को निपटाने के लिए
वह जरूरी हैं सामाजिक रोगों को रस्ता दिखाने के लिए
तो आईये हम सब यह संकल्प करें
मिथ्या को अपनाकर दुनिया को स्वतंत्र करें।
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