शीर्षक- मैं दिगंबर हूँ
1)
भले नही त्यागे हो मैने कपड़े-लत्ते
खेलता नहीं कभी भी मैं बनावटी पत्ते
स्वार्थ से मुक्त एक स्वच्छंद अंबर हूँ
मैं दिगंबर हूँ।
2)
करता हूँ अहिंसा को प्रशस्त
बनाना है जीवन को उच्चस्त
कोई अपेक्षा नहीं, मस्त कलंदर हूँ
मैं दिगंबर हूँ।
3)
सदाचार कभी हारता नही
उसका मृत्यु से कोई वास्ता नही
देवों में राजा इंद्र हूँ
मैं दिगंबर हूँ।
4)
जिनों का पैगाम है
एक नहीं चौबीस का आह्वान है
सैंकड़ों गुरुओं का स्वयंवर हूँ
मैं दिगंबर हूँ।
5)
महावीर स्वामी का कायदा है
इसमें बहुत ज्यादा फायदा है
पालन में इसके निमग्न अगर हूं
मैं दिगंबर हूँ।
6)
तपश्चर्य का ऐलान है
आदिनाथ से आया हुआ फरमान है
मनुष्य नहीं कदाचित बंदर हूँ
मैं दिगंबर हूँ।
7)
आत्मा में इत्मीनान है
उससे बड़ा नही कोई ईमान है
शांति में भी अंधड़ हूँ
मैं दिगंबर हूँ।
8)
कटिबद्ध हूँ आनंद के लिए
अपने लिए ही नही सर्वस्व के लिए
जलाशय हूँ , समुंदर हूँ
मैं दिगंबर हूँ।
9)
नही चलाया अपना नियंत्रण कभी
जिनों की ओर रहा है आकर्षण सभी
साधना में शायद सुंदर हूँ
मैं दिगंबर हूँ।
10)
नैतिकता ही अहिंसा है
अहिंसा ही नैतिकता है
बस इसी सिद्धांत को मानकर, बाकी सब से बेकद्र हूँ
मैं दिगंबर हूँ।
11)
जिनों के लिए जीना है
जिनों के लिए मरना है
इसी लक्ष्य के लिए बार-बार होता कब्र हूँ
मैं दिगंबर हूँ।
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