शीर्षक - विग्यान देगा हमें मुक्ति और संपूर्ण आनंद


एक ही चुनौती है सबसे विशाल 

जीतना है हमको महाकाल 

सारा द्वंद है इसी की ओर 

समय ही बनाता है हमे कायर और चोर 

समय चलता है एक प्रवाह की तरह 

सबकुछ होता है बिना किसी ठोस वजह

सारा द्वैत है समाया हुआ है विराट समय में 

क्यों हम बैठें हैं समर्पित विनय में 

अध्यात्म ने हमे सिखाया है समय से उपर उठने का तरीका  

कहते हैं उसे मोक्ष या निर्वाण, जिससे जग जाता है जीता 

पर वह मोक्ष या निर्वाण एक व्यक्तिगत प्रयास है 

वह त्याग से होता है, उसमे नही कोई व्यापक आवास है 

हमे कुछ ऐसा करना है जो सामूहिक और सार्वभौमिक हो 

जो बदल दे यथार्थ को, ऐसा कोई मेकेनिक हो 

हमे विग्यान में एकदम तीव्र हो जाना है 

उसमे प्रगाढ़ होकर हमे अत्यंत वीर हो जाना है 

अत्यंत मेहनत, एकाग्रता और जुझारूपन से हमे पाना है एक एसा परिवर्तन 

जिससे मिल जाए हमे मुक्ति कूछ ऐसा हो अवतरण 

समय ईश्वर का जोर है, ईश्वर की ताकत है 

पर मनुष्य कौन सा कम है, जीतना उसकी आदत है 

खत्म करने हैं हमे सारे दंद और फंद 

विग्यान देगा हमें मुक्ति और संपूर्ण आनंद

आईए समय को जीतकर हम अपनी निर्बलता को अपदस्थ कर दें 

आईए मनुष्य को अमरत्व में लाकर मनुष्य को सर्वशक्त कर दें।

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