शीर्षक - जब भारत का होगा मुस्लिम प्रधानमंत्री और पाकिस्तान का होगा हिंदू वजीर-ए-आजम


बात नहीं यह नामुमकिन है 

मुझे विश्वास है होना इसे एक दिन है 

जब धर्म जुनून नही एक ताकत बन जाएगा 

जब समाज अथाह स्वतंत्रता देकर तन जाएगा 

जब देशों में होगा मुकाबला आदर्शवाद लाने के लिए 

जब जूझेंगे सब ईश्वर का आशीर्वाद पाने के लिए 

कि यह टकराव या फसाद वास्तविक स्वभाव नही है अखंड अस्तित्व का 

क्योंकि बहुत दूर है क्लेश और घृणा मानव के केंद्र से,यह नही खंड एक मानवीय व्यक्तिव का 

जब पहचान नही होगी जाति, धर्म और नस्ल के आधीन 

जब स्वतंत्र होगी मानवीय सोच, नही होगी पूर्वाग्रहों से पराधीन 

क्या है हिंदू क्या है मुसलमान, सब इतिहास की घटना है 

तकदीर का खेल है यह, किसी का होता मुंडन किसी का होता खतना है 

इतिहास का चला आ रहा यह अवरोध, अब दूर होना चाहिए 

व्यक्ति के पूरे सत्व का नही विरोध होना चाहिए 

जब हर व्यक्ति स्वतंत्र होगा तब जातीय पहचान गौण हो जायेगी 

फिर भी कई लोगों के लिए इतिहास को विपरीत करना, एक लक्ष्य एक दौड़ हो जाएगी 

तब उभरेगा उदारवादियों का खेमा, जो उलट देगा बची-कुची बुराई की सत्ता 

जब सभी को मिलेगा एक मधुर एक समरस जीवन जीने का असरदार भत्ता 

जब सर्वस्व में होगी प्रशांति और सारी  अच्छाई का होगा एक विराट समागम 

जब भारत का होगा मुस्लिम प्रधानमंत्री और पाकिस्तान का होगा हिंदू वजीर-ए-आजम। 

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