शीर्षक - जैन धर्म है सबसे पूर्ण धर्म


सारी मान्यताओं का जैन धर्म राजा है 

बजाता क्रूरता का असरदार बाजा है 

हर जीव का सम्मान करता है

अहिंसा का संपूर्ण ऐलान करता है 

प्रत्येक आत्मा को मानता पूर्ण ब्रम्ह है 

और नही कोई परभात्मा, न कोई परब ब्रम्ह है 

बाहरी ईश्वर को मानना एक प्रक्षेपण है 

संसार की अधिक चाह का ठोस विश्लेषण है 

सारी आत्माओं को संपूर्ण करके

किसी और परमात्मा के विथान को दूर करके

यह रचता एक आध्यात्मिक, नैतिक गणतंत्र है 

सब बराबर हैं उसका यही एक मंत्र है 

रखता है कर्मों को सदा केंद्र में 

अहिंसा और तपश्चर्य से लगता है किनारा, हर जिनेन्द्र में 

इसके पास क्या नायाब खूबी है

इसको थामने वाले की नैय्या कभी न डूबी है 

और कौन सा धर्म आपको भगवान बनाएगा 

बनाएगा भी तो और भगवानों के नाम बनाएगा 

यह धर्म कठिन है, पर इतना भी ज्यादा कठिन नही 

जीवन की क्लिष्टता और खोखलेपन से अधिक इसमें जतन नही 

कर सकते हैं हम इस धर्म को अपनी तरह लागू 

अहिंसा अहिंसा है, और तपश्चर्य है अपने बुराईयों को करना काबू 

संख्या इसकी कम है पर हीरा भी तो कम है इस दुनिया में 

यह भी बेशकीमती है हीरे की तरह, है एकदम तन्हा में 

है सबके लिए यह बराबर, चाहे कोई भी हो जाति, हो कोई भी हो वर्ण 

जैन धर्म है सबसे पूर्ण धर्म । 

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