शीर्षक - अंतिम आंदोलन का आगाज
ऐसा परमवीर का सशक्त ऐलान है
दुनिया पर जिसका बहुत एहसान है
वह चाहता था लाना एक सार्वभौमिक समन्वय
जिसमे सब एक हो जाएं और एकसाथ ही चलें होकर तन्मय
हर व्यक्ति मूलतः एक आत्मा है
और आत्मा के सिवाय नही और कोई परमात्मा है
इस विराट दर्शन के अमलीकरण के लिए मनुष्यों को आध्यात्मिक तौर पर रुकना है
उनको मनुष्य योनी तक ही काफी हद तक झुकना है
अन्य सारी योनियों को मनुष्य योनी तक आना है
फिर एक साथ मुक्ति की ओर बढ़ते जाना है
यह एक बहुत ही बड़ा अभियान है, जो ब्रम्हांड को बदल देगा
पर इसी में सर्वोच्च इत्मीनान है, जो सबका हल कर देगा
जब तक एक साथ नही आते तब तक सबकुछ बेकार है
जीवों के बीच कार्मिक फासले को घटाए बिना अस्तित्व का मकसद दुश्वार है
करना है सतत अहिंसा और तपश्चर्य का कठोर अनुसरण मनुष्यों को
इन अर्जित पुण्यों से बदलना है निवेश बाकी जीवों के कार्मिक दृश्यों को
पर इस लक्ष्य को मानना है बहुत सारे लोगों को
तभी बनेगा यह आंदोलन वास्तविक, मिटा कर बहुत सारे भोगों को
यह ब्रम्हांड अनेक आत्माओं का गणतंत्र है
जो ग्यानी है वह स्वतंत्र हैं, बाकी सब परतंत्र हैं
एक चिंगारी कुछ भी नही है जबतक वह विशाल आग न बन जाए
व्यक्तिगत कैवल्य स्वार्थ है कि कही वह दाग न बन जाए
इस सामूहिक नैतिक-अध्यात्मिक आंदोलन को बढाना होगा
वर्ना हमे अस्तित्व का उद्देश्य ही पूरी तरह भुलाना होगा
यह होगा एक न एक दिन, काश प्रलय आने के पहले ही हो जाए
अंदेशे से डर नही लगता, पर वह अंजाम आज दुपहैले हो जाए
यह है परमवीर का परम-लक्श, करो इसे लेकर सही अंदाज
आईए दिखाऊं आप सभी को अंतिम आंदोलन का आगाज
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